बारिश जब भी आती है
मेरे दिल में भी बाढ़ ला देती है
बर्बादी का मंजर फिर दिखा देती है
इसी बारिश की तरह तुम भी
बरसती थी कभी मुझ पर
जब भी आती थी मेरे पास
बारिश की तरह ठंडक लाती थी
जैसे बारिश में फूल खिल उठते हे
वैसे में भी तुम्हारी मौजूदगी में खिल उठता था..
अब बस बारिश आती है तुम नही.....
Thursday, December 21, 2017
बारिश
आज़ादी
कोशिश सब करतें हैं उड़ने की,
पर कुछ परिंदे ही आज़ाद होते हैं।
रूढ़िवादियों की बेड़ियों में बंधना आसान नहीं,
उसके लिए खुद को मारना पड़ता हैं।
आसान नही जीना ख़ुद की शर्तों पे यंहा,
कई दफा अपनों से ही लड़ना पड़ता हैं।
ऐसे ही नही मिल जाती उड़ान पंछियो को,
उन्हें भी अपने पंख फड़फड़ाने पड़ते हैं।
Monday, December 18, 2017
मैं
बंदीसे थी,
में उड़ गया।
अंजाने में,
जुर्म कर गया।
वो सख़्त थे,
अनुशासन में।
में वही अंजाने,
में तोड़ गया।
अपनी शर्तों पे,
यंहा जीना अब
जुर्म हो गया।
में यही जुर्म,
बार-2 कर गया।
में अब,
रिस्तों से दूर,
सपनों के पास था।
बस यही
गुनाह हो गया,
में अपनी शर्तों पे जी गया।
Saturday, December 16, 2017
मैं
शून्य हूं न अंनत हूं
बस खुद में मगन
आधार हूं न आसमान हूं में मध्य में विराजमान हूं
दुसरो पे यकीन नही पर
खुद पे विश्वास है
सुनता सबकी हूं पर मेरे
खुद के विचार हैं
कठोर हूं लौह की तरह
तप्त से पिघल जाता हूं
नफरत निभानी आती नही
मोह्हबत शिद्दत से निभा लेता हूं
शून्य हूं न अंनत हूं
बस खुद में मग्न हूं
इश्क़
तुम्हारे लबो पे मेरा जिक्र
तुम्हारे दिल में मेरी फ़िक्र
काफी है
तुमसे करने को इश्क़...
यूं तुझे देख के मेरा मुस्कुराना
यूं तुम्हारा होले से शर्माना
काफी है
तुमसे करने को इश्क़...
मेरी छोटी छोटी बातों में तेरा रूठना
तुम्हारी छोटी छोटी खुशियों में मेरी ख़ुशी ढू
काफ़ी है
तुमसे करने को इश्क़...
मेरे वो वादे
तुम्हारी वो उम्मीदें
काफी है
तुमसे करने को इश्क़...💝
Tuesday, December 5, 2017
आख़िरी मुलाकात
मुलाक़ात आख़िरी थी
उसे पता था , मुझे पता था
मंजूर किसी को नही था..!
वो जाते समय जो
हाथ मिले ,पता था अब छुटे तो फिर मिलना मुमकिन नहीँ..
वो एक दूसरे को देख के मुस्कुराना , ये भी आख़िरी बार हो रहा था
दो दिल बाहर से हँसते हुए अंदर से रो रहें थे...
वो आख़िरी मुलाकात,
मुस्कान,
आँखे नम थी
गला रुद्ध हो गया था
बस चल रही थी तो साँसे
एक दूसरे को एहसास दिलाने के लिए की
हां जिन्दा हूं में...
सब्र और समझ
छोटे से गांव के एक क़स्बे में बाप अपने बेटे को डांट रहा था "आ गओ ठाकुर के छोरे से लड़के" गुस्से से तमतमाया बाप पास रखे लोटे से पान...
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शून्य हु न अंनत हु बस खुद में मगन हु आधार हु न आसमान हु में मध्य में विराजमान हूं लक्ष्य ज्ञात है पर रास्ता अज्ञात हे दुसरो पे यकीन नही...
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मोह्हबत अचानक से तुम्हारी याद आ जाना और फिर लाख कोशिश करने के बाद भी चेहरे पे आने वाली स्माइल को रोकना नामुमकिन होता है मेरे लिए . रोकना चा...
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11th मेँ था जब उसे पहली बार देखा था स्कुल का पहला दिन था स्कूल के किसी प्राइवेट स्कूल से पढ़ के आयी थी और हम ठहरे सरकारी स्कूल के छात्र । ...
