Thursday, November 23, 2017

मोह्हबत

मोह्हबत
अचानक से तुम्हारी याद आ जाना और फिर लाख कोशिश करने के बाद भी चेहरे पे आने वाली स्माइल को रोकना नामुमकिन होता है मेरे लिए . रोकना चाहता नही में पर अजीब लगता है न अकेले अकेले मुस्कुराना ।
जंहा तुम्हारे होने का अंदेशा हो वँहा तुम्हे ढूंढना और फिर न दिखने पर सोचना की में ढूंढ ही क्यूँ रहा था तुम यंहा कहा दिखोगी
अजीब लगता है ढूंढने का बाद जब सोचो की में ढूंढ क्यों रहा था।
नजरो के सामने आने के बाद नजरे न मिला पाना और फिर अफ़सोस करना की नजर मिला क्यूँ नही पाया.
अजीब लगता हे बाद मे अफ़सोस करना जबकि में अफ़सोस करना नही चाहता.
तुमसे बात करते समय दिल दिमाग बहुत तेज दौड़ते हे पर ये मुह दगा कर जाता है आवाज ही नही निकालता
अजीब लगता है जब बाद में सोचो की में तो ये बोलने वाला था बोला क्यूँ नही.
तुम्हे किसी बात के लिए मनाना और तुम्हारा न मानना
क्या पता क्यों खुद पे हँसी आती है उस समय.
गाने सुनते समय अचानक से तुम्हारा फेवरेट गाना जब हेडफोन पे बजता हे न तो मेरा फेवरेट गाना उसके आगे फीका पड़ जाता है.
कभी लगा नही मुझे की काश तुम ऐसी होती .
बस लगता है जैसी हो बेसी ही रहो तो अच्छा है थोड़ी सी ज़िद्दी.
अच्छा लगता है जब तुम्हारे मुह से मेरी बुराई सुनता हूं .
तुम्हे चिढ़ाना अच्छा लगता है और जब तुम चिढ़ के मुह बनाती हो उफ्फ.
जब तुम रूठ जाती हो मुझसे, तो जान ही निकल जाती है मेरी।
तुम्हे लिखना कभी आसान नही रहा मेरे लिए एक कोशिश हमेसा करते रहा हूं में

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