शून्य हु न अंनत हु बस खुद में मगन हु
आधार हु न आसमान हु में मध्य में विराजमान हूं
लक्ष्य ज्ञात है पर रास्ता अज्ञात हे
दुसरो पे यकीन नही पर
खुद पे विश्वास है
सुनता सबकी हु पर मेरे
खुद के विचार हे
कठोर हूं लौह की तरह
तप्त से पिघल जाता हूं
किसी की बातो से सहमत जल्दी नही हो पाता हूं बिना तथ्य के असहमत हो नही पाता हूं
प्रशंसक कम हु फिर भी लोग चापलूस न समझ ले इसलिये आलोचक बन जाता हूं
उस जमाने से नफरत हे मुझे जो बन्धनों में हे बांधती
रूढ़िवादियों से हु घिरा पर रूढ़िवादी नही
में शून्य हु न अंनत हु बस खुद में मगन हूं😊
क्रमशः......
No comments:
Post a Comment