मुलाक़ात आख़िरी थी
उसे पता था , मुझे पता था
मंजूर किसी को नही था..!
वो जाते समय जो
हाथ मिले ,पता था अब छुटे तो फिर मिलना मुमकिन नहीँ..
वो एक दूसरे को देख के मुस्कुराना , ये भी आख़िरी बार हो रहा था
दो दिल बाहर से हँसते हुए अंदर से रो रहें थे...
वो आख़िरी मुलाकात,
मुस्कान,
आँखे नम थी
गला रुद्ध हो गया था
बस चल रही थी तो साँसे
एक दूसरे को एहसास दिलाने के लिए की
हां जिन्दा हूं में...

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