शून्य हूं न अंनत हूं
बस खुद में मगन
आधार हूं न आसमान हूं में मध्य में विराजमान हूं
दुसरो पे यकीन नही पर
खुद पे विश्वास है
सुनता सबकी हूं पर मेरे
खुद के विचार हैं
कठोर हूं लौह की तरह
तप्त से पिघल जाता हूं
नफरत निभानी आती नही
मोह्हबत शिद्दत से निभा लेता हूं
शून्य हूं न अंनत हूं
बस खुद में मग्न हूं
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