बारिश जब भी आती है
मेरे दिल में भी बाढ़ ला देती है
बर्बादी का मंजर फिर दिखा देती है
इसी बारिश की तरह तुम भी
बरसती थी कभी मुझ पर
जब भी आती थी मेरे पास
बारिश की तरह ठंडक लाती थी
जैसे बारिश में फूल खिल उठते हे
वैसे में भी तुम्हारी मौजूदगी में खिल उठता था..
अब बस बारिश आती है तुम नही.....
Thursday, December 21, 2017
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सब्र और समझ
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