Monday, January 8, 2018

मोहब्बत

रात के 3 बज रहें थे, शहर के इकलौते बड़े अस्पताल के ICU वार्ड में ICU की बाहर वाली बेंच में बैठी एक लड़की फफक फफक के रो रही थी। उसे सहलाने के लिए वँहा कोई मौजूद भी नही था..! राहुल उसके सामने वाली बेंच में चुपचाप बैठा था। उसके दादा ICU में भर्ती थे । वो घर मे सबसे ज्यादा प्यार अपने दादाजी से ही करता था जो अभी ICU में भर्ती थे । हॉस्पिटल में आज रुकने की उसकी ड्यूटी थी।
        रोने वाली लड़की का नाम आरुषि था। दो नर्सो के आपस मे बात करने से उसे पता चला था कि उसका भाई ICU में भर्ती था ।जिसका एक्सीडेंट तेज बाइक चलाने से हुआ था।
         आज राहुल को पता चला था कि लड़कों का दिल ज़्यादा कठोर होता है। वो आँसू दिल मे ही बहा लेते है आंखों तक आने नही देतें ।
वो हॉस्पिटल की कैंटीन से दो कप चाय लेके आया और आरुषि के पास बैठ गया और उसे रुमाल देते हुए चाय ऑफर कि।
आरुषि अपनी रुमाल दिखाते हुए बोली~
"में चाय नही कॉफी पीती हूँ"

राहुल उठा और एक बार और केंटीन जाके उसके लिए कॉफ़ी ले आया और उसे दे दी।
आरुषि ने एक शिप मारते हुए कहां
"इन्हें कॉफी बनानी नही आती क्या इतनी मीठी करदी है"

राहुल हैरान था...
2 मिनिट पहले जिस लड़की के मुँह से एक शब्द पूरा निकलना दुसवार था वो अब कॉफी का टेस्ट जज कर रही थीं।

राहुल कुछ बोलता इतने में ही आरुषि बोल उठी
"तुम्हारा यंहा कौन भर्ती है?"
"दादाजी"
राहुल बजह बताता इससे पहले आरुषि बोल पड़ी
"बुज़ुर्ग हो गए होंगे न वो तो बहुत"
राहुल अपनी जुबां तक आये शब्द वापस करके बोला
"हां 78 साल के हैं"
राहुल ने औपचारिकता निभाते हुए बोला
"तुम्हारा यंहा कौन भर्ती है?"
आरुषि ने बिना उसके तरफ देखे बोला
"भाई"
राहुल बजह जानने के लिए बोला
"उसे क्या...."
राहुल की बात को अनसुना करते हुए आरुषि बोलने लगी
"भाई नही जिंदगी है वो मेरी, पूरी लाइफ में सिर्फ एक ही तो दोस्त बना है मेरा वो है मेरा भाई, अभी भी मेने उसे मेरे बर्थडे में गिफ्ट लाने को कहां था । उसी के लिए पैसे इकठ्ठे कर रहा था।"
राहुल बीच मे बोला
"तो"
इस बार आरुषि दांत पीसते हुए बोली
"कुछ कमी हो गई तो निकल गए जनाब रेस लगाने।"
शायद उसे खुद पे या अपने भाई पे गुस्सा आ रही थी।
राहुल बोला
"ओह ज्यादा तेज गाड़ी चलाने के कारण एक्सीडेंट हो गया"
आरुषि थोड़ी देर चुप रहीं फिर बोलना शुरू किया
"पता है जब उसे हॉस्पिटल लाये तब उसने मुझसे कहां था कि तू ये बात मत बताना की में तेरे गिफ्ट के लिए पैसे इकठ्ठे कर रहा था। नही तो पापा तुझे डांटेंगे"
इतना कहते कहते आरुषि फिर फफक फफक के रोने लगी।

राहुल को नही आता था सहलाना कैसे है तो वो बोला
"तुम्हारा भाई ठीक हो जाएगा"
इस बार आरुषि ने उसकी तरफ देखा और कंहा
"उसे ठीक होना ही पड़ेगा"
राहुल उसकी रोती आंखों में अचानक से तेज देख के  बोला
"मतलब वो जल्दी ठीक हो जाएगा"

हॉस्पिटल में 10 दिन हो चुके थे , राहुल के दादा दो दिन पहले ही डिस्चार्ज होके घर चले गए थे । आज आरुषि का भाई  डिस्चार्ज हो रहा था इसलिए वो उसके लिए गुलदस्ता लाया था।
इन पन्द्रह दिनों में बहुत कुछ हुआ आरुषि उसकी अच्छी दोस्त बन गई थी और उसके भाई को जबसे होश आया था वो तीनो बहुत देर तक बात करतें रहते ।
       आरुषि के भाई के रूम में दाखिल होते ही उसने आरुषि और उसके भाई आरव को देखा और अपने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए गुलदस्ता उसके आगे बढ़ाते हुए बोला
"ये तुम्हारे लिए"
आरव शरारती अंदाज में बोला
"मेरे लिए लाए या इसके लिए"
आरुषि खिलखिला के हँस पड़ी और राहुल झेंप गया।
    इतने दिन साथ रहने के बाद भी वो आरुषि को समझ नही पाया था। उसे अब भी समझ नही आता कि वो गुस्सा दिखाते दिखाते अचानक से हंसी मजाक क्यों करने लगती है, हँसते हँसते अचानक से शांत हो जाती है जैसे थोड़ी देर पहले क्या वो कभी जिंदगी में हँसी ही न हो।
राहुल आरुषि के परिवार को अच्छे से जानने लगे था। उसके घर मे दादी थी जो आरव से बहुत प्यार करती थी और पापा थे जिनकी आरुषि परी थी। एक माँ भी थी जिनके बारे में राहुल ने बस सुना था न कभी तस्वीर में देखा न हॉस्पिटल में....
शायद सौतेली माँ थी, उनके बारे में आरुषि ने कभी भी जिक्र नही किया या जिक्र करना जरूरी नही समझा...।
              आरव हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हो चुका था। अब वो घर में आराम कर रहा था और आरुषि उसकी देखभाल । राहुल भी घर आके कॉलेज ट्यूशन में बिजी हो गया। पर वो इंतजार कर रहा था आरुषि के मैसेज का उसे उम्मीद थी कि आरुषि को उसकी याद हमेसा न सही कभी कभी तो आती ही होगी।
   वक्त बीता दिन से सप्ताह हो गए। राहुल का सब्र टूट चुका था आखिर कोई इतना सेल्फिश कैसे हो सकता है, आरुषि तो बिल्कुल भी नहीं।
उसने आरुषि से मिलने का फ़ैसला किया । बिना बताएं राहुल    आरुषि के घर के सामने खड़ा था।हाथों में गुलाब था जिसके पत्ते राहुल के हाथों मसल गए थे....आज वो आरुषि से कुछ कहने आया था शायद दिल की बात।उसे नही पता था आगे क्या होने वाला है उसने कंपकपाते हांथो  से डोरवेल बजाई। दरवाजा  लंगड़ाते हुए आये आरव ने खोला घर में कोई नही था आरव टीवी देख रहा था और आरुषि किचन में थी। राहुल के अंदर आते तक आरव आरुषि को बुला चुका था।
अब राहुल की मंजिल ठीक उसके सामने खड़ी थी।
      आरुषि उसे देख के मुस्कुरा रही थी और राहुल उसे देख के झेंप रहा था..।
हाल चाल पूछने के बाद राहुल ने आरुषि से पूछा
"कंहा थी इतने दिन मैसेज भी नही किया"
आरुषि ने टालने के अंदाज से कहा
"थोड़ा बिजी थी"
राहुल बेताब था वो नही चाहता था अब पूरा गुलाब का फूल उसके हाथों कुचला जाए इसलिए उसने देर न करतें हुए आरुषि की आंखों में आंखे डालते हुए कहा
- "आरुषि मोह्हबत हो गई है तुमसे, न मुझें नींद आ रही न ही खुद को ढूंढ पा रहा हूं बस तुमपे खो से गया हूं मैं"

आरुषि ने नजर हटाई और कहा
"राहुल ये कंहा पहुँच गए तुम, तुमसे दोस्ती मैने इसलिए कि क्योकि तुम अच्छे लगते हो पर इतने नही। तुमने साथ दिया मेरा जब में जूझ रही थी दर्द से, पर मुझें नही चाहिए तुम्हारा साथ जिंदगी भर का। तुमसे मदद इसलिए मांगती थी क्योंकि तुम करते थे मदद इसका मतलब ये नहीं कि मोहब्बत है मुझें तुमसे। तुम जानने लगे हो मुझें पर इसका मतलब ये नही की पूरा जान चुकें हो।
शायद तुमनें मेरी हंसी को प्यार समझ लिया.....पर में अपनी मम्मी को देख के भी हंसती हूं!!!"

   राहुल निःशब्द था । बोलने और सुनने के लिए अब कुछ बचा ही नहीं, गुलाब की अब पंखुड़ी भी फर्स में गिर चूंकि थी।

वो निकल गया घर से ये सोच के कि
"इश्क़ किया था मैंने, सपने भी सँजो लिए थे, बस उन सपनों को पूरा करने की उम्मीद जिससे लगाई थी उसने साथ न दिया।
इश्क़ अधूरा रह गया था उसका। वो पूरा कर सकती थीं पर कर न सकी। मैं अब अपने इश्क़ को पूरा करने के सपनें देखूंगा पर उसके साथ जो सपनें पूरा करने में साथ दे...........🧡

Friday, January 5, 2018

आख़िरी ख़त

इश्क़ किया था मैंने
हां तुमने भी किया था
सपने देखें थे मैंने
हां तुमने भी देखें थे
वादे किये थे मैंने
हां तुमने भी किये थे
पर वादे मैं निभा सकता था
पर तुम नही निभा सकीं
अपने इश्क़ को पूरा करना था मुझे
पर तुम पीछे हट गई
हां तुम भी चाहती थीं पर कर न सकी पर मैं कर सकता था अगर तुम्हारा साथ रहता तो....

मेरा इश्क़ अधूरा रह गया
तुम्हारा भी....
नही तुम तो उस इश्क़ को किसी और के साथ पूरा कर लोगी

मैं भी अपने इश्क़ को अधूरे नही रहने देना चाहता

मैं भी करूँगा इश्क फिर से पर उससे जिसके साथ मंजिल तक पहुँच जाऊँ..

पर अब किसी में खोने से पहले मुझे खुद में खोना है....

खुद को जीना है मुझें अब
तुम्हारे साथ रहतें मेंने बस तुम्हे जिया है..

अब मैं उसमें खोउंगा जो मुझमें खोये

मैं उसे जिऊंगा जो मुझें जिये...

मैं करूँगा फिर से किसी से वादे
पर उससे जो खुद भी वादे पूरे करने के लिए वादे करें।

हां आओगी याद तुम
आखिर अधूरी ही सही मोहब्बत हो तुम मेरी
पर तब जो मोहब्बत रहेंगी मेरी वो तुमसी नही होगी कतई नहीं....

अब मैं फिर से अपनी जिंदगी को रंगीन करूँगा
उसके साथ जो उजाड़े ना....

         हाँ करना है मुझें इश्क़ फिर से पर तुमसे नही...
तुम्हारा लौट आना मुमकिन नहीं पर मेरी जिंदगी में तुमसे बेहतर मोहब्बत का आना सम्भव है..

तुम वेवफ़ा नहीं पर तुमसे वफ़ा भी शिद्दत से नही निभाई गई

मजबूरियां थी तुम्हारी भी
पर हम मिलके उन्हें हल कर सकते थे...
तुमने मेरा साथ जरूरी न समझा
शायद तुम खुद को मेरे लायक नही समझतीं...
   तुम सही हो मुझें फिर से मिल जाएगा इश्क तुमसे बेहतर....उम्मीद नही यकीन है मुझें❤️

जिसे मैं चाहूंगा दुनिया से बढ़ कर और वो मुझें...

अब बस खोना है मुझें खुद में...
वो सब पाना है जो मुझे मेरे लिए पाना है..
खुद को जीना है मुझे...
अब मैं
किताबों को वक्त दे पाऊंगा जिनके लिए में अपने घर से दूर हूँ.....

खुद के पास आना है अब मुझें
खुद को पाने के लिए💐

सब्र और समझ

छोटे से गांव के एक क़स्बे में बाप अपने बेटे को डांट रहा था "आ गओ ठाकुर के छोरे से लड़के" गुस्से से तमतमाया बाप पास रखे लोटे से पान...