Friday, January 5, 2018

आख़िरी ख़त

इश्क़ किया था मैंने
हां तुमने भी किया था
सपने देखें थे मैंने
हां तुमने भी देखें थे
वादे किये थे मैंने
हां तुमने भी किये थे
पर वादे मैं निभा सकता था
पर तुम नही निभा सकीं
अपने इश्क़ को पूरा करना था मुझे
पर तुम पीछे हट गई
हां तुम भी चाहती थीं पर कर न सकी पर मैं कर सकता था अगर तुम्हारा साथ रहता तो....

मेरा इश्क़ अधूरा रह गया
तुम्हारा भी....
नही तुम तो उस इश्क़ को किसी और के साथ पूरा कर लोगी

मैं भी अपने इश्क़ को अधूरे नही रहने देना चाहता

मैं भी करूँगा इश्क फिर से पर उससे जिसके साथ मंजिल तक पहुँच जाऊँ..

पर अब किसी में खोने से पहले मुझे खुद में खोना है....

खुद को जीना है मुझें अब
तुम्हारे साथ रहतें मेंने बस तुम्हे जिया है..

अब मैं उसमें खोउंगा जो मुझमें खोये

मैं उसे जिऊंगा जो मुझें जिये...

मैं करूँगा फिर से किसी से वादे
पर उससे जो खुद भी वादे पूरे करने के लिए वादे करें।

हां आओगी याद तुम
आखिर अधूरी ही सही मोहब्बत हो तुम मेरी
पर तब जो मोहब्बत रहेंगी मेरी वो तुमसी नही होगी कतई नहीं....

अब मैं फिर से अपनी जिंदगी को रंगीन करूँगा
उसके साथ जो उजाड़े ना....

         हाँ करना है मुझें इश्क़ फिर से पर तुमसे नही...
तुम्हारा लौट आना मुमकिन नहीं पर मेरी जिंदगी में तुमसे बेहतर मोहब्बत का आना सम्भव है..

तुम वेवफ़ा नहीं पर तुमसे वफ़ा भी शिद्दत से नही निभाई गई

मजबूरियां थी तुम्हारी भी
पर हम मिलके उन्हें हल कर सकते थे...
तुमने मेरा साथ जरूरी न समझा
शायद तुम खुद को मेरे लायक नही समझतीं...
   तुम सही हो मुझें फिर से मिल जाएगा इश्क तुमसे बेहतर....उम्मीद नही यकीन है मुझें❤️

जिसे मैं चाहूंगा दुनिया से बढ़ कर और वो मुझें...

अब बस खोना है मुझें खुद में...
वो सब पाना है जो मुझे मेरे लिए पाना है..
खुद को जीना है मुझे...
अब मैं
किताबों को वक्त दे पाऊंगा जिनके लिए में अपने घर से दूर हूँ.....

खुद के पास आना है अब मुझें
खुद को पाने के लिए💐

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