Saturday, September 30, 2017

मूवीज़

फिल्मे मनोंरजन का एक बेहद उपयुक्त  साधन होती जा रही हे।
लोग संडे का प्लान कहि घूमने जाने की बजाए मूवी देखने का बनाने लगे है।
सब मूवी एक सी नही होती
आपको कुछ पसंद आती है , कुछ नही।और जो नही आती उनका रिव्यू आप ऐसे बताएंगे किसी को की सामने वाले को लगने लगेगा कि आपका सारा पैसा आपने इस मूवी में लगा दिया अब बर्बाद हो गऐ। फिल्मे वास्तविकता के आधार और बनती हो और उन्हें एक काल्पनिक ढांचे में ढाल दिया जाता है...
जैसे अभी टॉयलेट मूवी को ही देखिये मूवी ओरिजनल घटना पे आधारित थी पर उसकी स्टोरी को मनोरंजन की दृष्टि से काल्पनिक ढांचा दे दिया गया।
मुझे ऑब्सर्व करने की आदत है बहुत और कई मूवीज़ से में सीखा भी बहुत कुछ हें।
अब टॉयलेट को ही देख लीजिए
हम लोग भी आम जिंदगी में यही करते हे हमेसा "जुगाड़" बस जिंदगी भर इसी में बीत जाती है। कोई खाने का जुगाड़ कर रहा है कोई रहने का कोई मनोरंजन करने का।
कभी सोचा है आखिर मौत आ जायेगी और बस में जुगाड़ करता रहा जाऊंगा...।
जिंदगी में एक स्थिरता रहना चाहिए ये मेरा सोचना है।
पर लोगो का ओपीनियन ये भी हे इस भाग दौड़ में हम स्थिरता लाएंगे तो पीछे रह जायेंगे।
तो क्यों दौड़ना हे सबके जैसा अपनी मस्ती में चलो न दौड़ने वाले जल्दी पहुच जायेंगे आप थोड़ा लेट ही सही।
"बद्री नाथ की दुल्हनिया" मूवी जब देख के आया में तो कई रिव्यू पढ़े , हां देखने के बाद पढ़ा।
कुछ आलिया की तारीफ कर रहे थे कुछ वरुण की एक्टिंग की बात
पर किसी ने सोचा है
आलिया भागी क्यूँ , क्यूँ भागी वो तो मूवी में ही बता दिया गया। पर वो बापस भी आई अपने सपने को छूके बापस आयी ।
सोचना कभी क्या हमारे समाज में हे ऐसी लड़की और हैं तो सच में समाज इतना पिछड़ा है कि उन्हे खुद पंख फड़फड़ाना पड़ रहा है कुछ लहुलहान होके वही रह जाती है कुछ उड़ जाती है आज़ाद हो जाती है और पा ही लेती है खुद को खुद के सपनों को।
अभी हाल ही में एक मूवी आई थी "हाफ गर्लफ्रेंड"
कतई घटिया एक्टिंग मुझे तो पच ही नही रही थी ।
अगर कायदे से सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए एक्टिंग देखते हुए मूवी देखता तो इंटरवल के पहले दो बार और बाद में एक बार जरूर उल्टी कर देता ।
पर उसमे एक शानदार सीन आता है जब इंटरव्यू लेने वाला अर्जुन शाब से पूछता है कि "आपके राज्य की इतनी बुराई हे "
तब  अर्जुन शाब जो जबाब देते है उससे सीख में किसी भी बात को अच्छे ढंग से कैसे बोला जा सकता है चाहे उसमे खराबी ही क्यू न हो।
किस तरह से अपनी बात सामने वाले को आप समझा सकते हे।

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