शाम का समय हे में छत में चक्कर काट रहा हु सूरज को डूबते हुए देखते हुए । वैसे आदत नही हे यू छत में घूमना मेरी पर एक दिन पहले हुई हल्की बुदाबारी से आज की शाम का मौसम सुहावना सा हे ।
यू ही चक्कर काटते काटते अचानक हमे दो साल पहले जी बात याद आ गई ...
उस समय 11th में था में सुबह शाम कोचिंग और बीच का टाइम स्कूल में कट जाता था
उम्र होती है वो एक मतलब मेरी तो थी शायद मस्ती करने की थोडा किसी की छेड़खानी करने की, बस दिन रात यही सब दोस्तों के बीच चलता रहता था....
एक दिन क्या हुआ शाम को हम जब कोचिंग से लौट रहे थे चौराहे में एक लड़की दिखी ।वैसे लडकिया तो दिखती ही रहती थी पर वो थोडी अलग थी।
मतलब उसके कान आँख ज्यादा नही थे पर अलग थी।
सायकल में चल रही थी की अचानक सामने कोई गाड़ी अब गयी जिससे बो पैर से अपनी सायकल रोकने में कामयाब भी रही
आभार उसका भी देंगे उस गाड़ी बाले का जिसके कारण हमारा ध्यान उस लड़की पे गया
सायकल में सीट से उतर के पैर टेकी हुई ,
बाल थोड़े बिखरे से शायद हेअर स्टाइल रही होगी वो उसकी
लिपस्टिक डार्क थी ,
उसे इंग्लिश में कोनसा कलर कहते हे पता नही पर है बो कत्थई
था,,,
,जच रही थी उसमें वो ......
और
.आँखों में काला सुरमा
हाय बस लगे की जान ही निकल जाएगी अब तो.....
और मजे की बात ये हे की उस समय हम साऊथ की मूवी बहुत देखते थे
तो पहली नजर में मोह्हबत हो जाती थी उसमें विस्वास रखते थे भले ही न पता हो प्यार व्यार के बारे में ज्यादा
फिर ऊपर से हमारे फेवरेट सांग 90s की फिल्मों के " दिल ने ये कहा है दिल से मोह्हबत हो गई हे तुमसे " टाइप के ।
तो बस लगा हमे की कर बैठे मोह्हबत हम उससे
और तो और वो हमें रोज उस चौराहे में दिखने लगी हम आते थे वो जाती थी ........
फिर अचानक हमने गोर किया अवे साला ये तो शक्ल से सीनियर दिखती है ।
खासियत होती है चेहरे कि उम्र के साथ बदल जाता है तो हम जान लिए।
पर क्या हमें डायलॉग भी पता था वो वाला की प्यार उम्र नही देखता
फिर उसका चौराहे में दिखना जारी रहा और हमारा देखना ,की एक दिन यू ही हम मोहल्ले के बाहर दुकान गये तो वो वँहा से कही जा रही थी
हमारे दिमाग की घण्टी बजी" मामा रहती तो ये इधर कहि ही होगी"
पर तुरन्त अनुमान लगाना गलत था ।
एक दिन हम मोहल्ले के भैया के साथ जो उम्र में बड़े थे बस एक साल उनके साथ घूमने गये और वो नजर आ गई
जब उन्हें हमने थोड़ी बहुत स्टोरी सुनाई तो वोले
अबे एक साल बड़ी हे वे तुमसे हमारी क्लास की हे
फिर क्या था "मन में लड्डू फुटा"
हमने कहा एक साल कोई बात नही चलेगा उन्होंने घूरा और हम बात पलट दिए।
फिर रोज उनसे उसकी जानकारी मिलती गई नाम पता बाप का नाम बगैरा बगैरा ...
भेया हमारी मनोस्थिति भांपते हुए
वो बोले चल कॉपी लेने के बहाने तेरी बात कराता हूं
पर हम कहा एक no. के फट्टू बचपन से ही लड़कियों से बात नही कर पाते उनके सामने उनसे बड़े शर्मीले बन जाते थे तो बस बात वही अटक गई और मुलाकात न हो सकी ।
उस समय छुट्टियां आ गयी और हम गांव चले गए घूमने ,
जब हम आये तो वो नजर नही आयी
भेया ने बोला अवे उड़ गई तेरी मोह्हबत
हमने कहा "किसके साथ" तो बोले "अबे ढोर उसके बाप का ट्रांसफर हुआ है तो चली गई दुसरे शहर नाम भी काट ली स्कूल से"
हम बिलकुल शून्य हो गए घर आये शांति छाई रही हमारे अंदर !!
"साला पहली मोह्हबत और वो भी अधूरी हद हे वे" ये भी रह रह के मन में याद आ रहा था।
रह रह के डायलॉग भी याद आ रहा था ,"जब दिल टूटता है तो आवाज़ नही आती"
एक दो दिन रहा थोड़ा सा सीरियस और फिर न दिमाग में उसकी याद न दिल में ...
मतलब सब खत्म ,
लेकिन कहा देखो आज भी याद आ गई न उसकी
पर फिर हमने डिसाइड कर लिया ,अगर अब कभी इस तरह कोई लड़की पसन्द आये तो हम बात तो करेंगे उससे चाहे वो हा कर या न कर कम से कम यू मलाल तो नही रहेगा।
और हम ये भी नही चाहते की हमारी दूसरी मोह्हबत की कहानी भी अधूरी रह जाये ।
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