रॉबर्ट पेशे से एक शिक्षक थे
अंधविस्वास को पूरी तरह नकारने वाले..
छोटे कस्बे में जन्मे रॉबर्ट बड़े शहर में पढ़ाई करने के बाद फिर अपने जन्म स्थान आये थे । दूसरी क्लास से ही बड़े शहर की और रुख कर चुके रॉबर्ट जब अपना ग्रेजुएशन पूरा कर के गांव आये तो वँहा के लोगो का अंधविस्वास देख के चकित रह गए
21 वीं शदी जंहा लोग इससे पूर्ण तरह से नकार रहे हे ये लोग उस डर से जी रहे हे ।
पढ़े लिखे होने पर अपनी नैतिकता समझते हुए रॉबर्ट ने शहर की सुविधा को दरकिनार करके गांव में रहने की ठान ली और निश्चय किया कि अंधविस्वास को भगा के रहेंगे।
जीवन उपार्जन के लिए गांव के स्कुल में भी पढाने लगे सुबह स्कुल में पढ़ाते शाम को गांव वालों को भुत प्रेत नही होते उसके ऊपर ज्ञान देते....।
गांव वाले हामी भर के निकल जाते पर स्थिति नही बदलती ।
रात होने पर स्कुल के रास्ते में पड़ने वाला गांव के सबसे पुराने पेड़ के रास्ते में जाना मना था ,
तथाकथित कहानी यह थी की उसमे एक चुड़ेलन रहती है जो रात को जागती हे.......।
रॉबर्ट के ऊपर स्कुल की जिम्मेदारी थी ..,
वह आज काम में लेट हो गए थे रात के 10 बजे जब काम निपटा के लौटना चाहा तो अचानक उन्हें लगा दरवाजे में दस्तक हुई रॉबर्ट पुकारे
"कोन"
"कोन"
आवाज़ बस गई वापस नही आयी उन्होंने हवा का झोंका समझ के टेबल से ताला उठाया और दरवाजे में लटकाके अपनी सायकिल उठा के गांव को और निकल गए।
गांव वालों को समझाने की नई थ्योरी सोचते सोचते वो पुराने पेड़ के पार निकल गए तभी उन्हें लगा कोई उन्हें बुला रहा है
रॉबर्ट पलटे
वँहा अँधेरे के सिवा कुछ नही था
कुछ सेकंड देखने के बाद जैसे ही सामने अपना मुँह किया
और अपने सामने एक घुघराले बाल वाली लड़की को पाया जिसकी आँखे सामना लोगों से बड़ी थी कान बालों के पीछे छिपे होने के कारण नही दिख रहे थे,
रॉबर्ट चौके मन में भृम होने की आशंका के चलते एक हाथ से दोनों आंख मली और आँखे खोलते ही फिर आँखों के सामने सिर्फ अँधेरा था।
हवा का एक झोंक आया और उनके दाएं कान में कुछ कह कह के चला गया राबर्ट घवराये सायकल को जल्दी से जैसे ही आगे बढ़ाना चाहा लगा उसके चके बिना गीली जमीन के गर्त में फंसी हो और पूरे बल लगाने के बाद भी नही हिल रही हो..
तभी फिर पीछे से आवाज आई
"राबर्ट"
"राबर्ट"
इस बार राबर्ट पलट के पीछे का अंधेरा भी नही देख पाए
और कंपकपाते हाथो से सायकल छोड़ के लतखड़ाते पैरों से गांव की और भाग खड़े हुए...
सुबह गांव वालों ने देखा राबर्ट के घर ताला लटका था सायकल पेड़ के पास पड़ी थी...
और राबर्ट का कुछ पता नही था...!
Saturday, September 9, 2017
अंधविस्वास
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
सब्र और समझ
छोटे से गांव के एक क़स्बे में बाप अपने बेटे को डांट रहा था "आ गओ ठाकुर के छोरे से लड़के" गुस्से से तमतमाया बाप पास रखे लोटे से पान...
-
शून्य हु न अंनत हु बस खुद में मगन हु आधार हु न आसमान हु में मध्य में विराजमान हूं लक्ष्य ज्ञात है पर रास्ता अज्ञात हे दुसरो पे यकीन नही...
-
मोह्हबत अचानक से तुम्हारी याद आ जाना और फिर लाख कोशिश करने के बाद भी चेहरे पे आने वाली स्माइल को रोकना नामुमकिन होता है मेरे लिए . रोकना चा...
-
11th मेँ था जब उसे पहली बार देखा था स्कुल का पहला दिन था स्कूल के किसी प्राइवेट स्कूल से पढ़ के आयी थी और हम ठहरे सरकारी स्कूल के छात्र । ...
No comments:
Post a Comment