Friday, October 27, 2017
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सब्र और समझ
छोटे से गांव के एक क़स्बे में बाप अपने बेटे को डांट रहा था "आ गओ ठाकुर के छोरे से लड़के" गुस्से से तमतमाया बाप पास रखे लोटे से पान...
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शून्य हु न अंनत हु बस खुद में मगन हु आधार हु न आसमान हु में मध्य में विराजमान हूं लक्ष्य ज्ञात है पर रास्ता अज्ञात हे दुसरो पे यकीन नही...
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मोह्हबत अचानक से तुम्हारी याद आ जाना और फिर लाख कोशिश करने के बाद भी चेहरे पे आने वाली स्माइल को रोकना नामुमकिन होता है मेरे लिए . रोकना चा...
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11th मेँ था जब उसे पहली बार देखा था स्कुल का पहला दिन था स्कूल के किसी प्राइवेट स्कूल से पढ़ के आयी थी और हम ठहरे सरकारी स्कूल के छात्र । ...

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